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मृत्युकालिक कथन (Dying Declaration) क्या है? जानिए नए कानून (BSA) में इसके नियम और सुप्रीम कोर्ट के लेटेस्ट जजमेंट

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के तहत मृत्युकालिक कथन के मुख्य नियम मृत्युकालिक कथन  (dying  declaration) क्या है?  जानिए इसके नियम, कानूनी  महत्व और सुप्रीम कोर्ट के  लेटेस्ट जजमेंट  अपराधिक न्याय प्रणाली(criminal justice system) मैं कुछ सबूत ऐसे होते हैं, जो किसी उलझे हुए मामले का रुख पूरी तरह बदल देते हैं। इन्हीं में से एक सबसे महत्वपूर्ण और अचूक साक्ष्य है - मृत्युकालिक कथन (dying declaration)। आमतौर पर अदालत के सामने दिया गया बयान ही सबूत माना जाता है, लेकिन मृत्युकालिक कथन कानून का एक ऐसा अपवाद है जहां मरने वाले व्यक्ति के अंतिम शब्द ही आरोपी को सजा दिलाने का सबसे बड़ा आधार बन जाते हैं। आइए 'कानून आज तक' के इस विशेष लेख में समझते हैं कि नए पुराने कानूनों के तहत मृत्युकालिक कथन का क्या महत्व है और देश की शीर्ष अदालत (supreme court) का इस पर क्या रुख है?  1.मृत्युकालिक कथन का कानूनी आधार:  भारतीय साक्ष्य विधि में हाल ही में हुए बड़े बदलावों के बाद इसकी धाराओं में परिवर्तन आया है।  .पुराने कानून (Indian evidence act ,1872): पुराने कानून में म...

राम मंदिर चंदा चोरी मामला: जेल में आरोपी, सुप्रीम कोर्ट का रुख और वकीलों का बॉयकॉट; जानिए इसके सभी कानूनी पहलू

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अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान की पेटियों से चंदा चोरी होने का मामला इस समय देश का सबसे बड़ा कानूनी और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। राम भक्तों की आस्था से जुड़े इस मामले में पुलिस प्रशासन से लेकर देश की शीर्ष अदालत तक एक्शन में है। चूँकि यह मामला एक सरकारी आदेश पर बने ट्रस्ट से जुड़ा है, इसलिए इसके कानूनी पहलू बेहद गंभीर हैं।आज 'कानून आज तक' के इस विशेष लेख में हम आपको इस पूरे घोटाले से जुड़े सभी बड़े कानूनी पहलुओं, कोर्ट की कार्यवाही और आरोपियों पर लगी धाराओं के बारे में आसान भाषा में  समझते हैं। 1. मुख्य आरोपी जेल में: कौन सी कानूनी धाराएं लगी उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 25 जून को औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज की थी। इस मामले के मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा और अविनाश शुक्ला सहित 8 लोगों को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर आपराधिक धाराएं लगाई गई हैं आपराधिक गबन (Criminal Breach of Trust): ट्रस्ट की संपत्ति या जनता के पैसे का निजी इस्तेमाल करना...