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Firozabad Shikohabad Arav Murder Case: मासूम आरव के कातिल को 41 दिन में मिली फांसी की सजा, जानें कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

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shikohabad-arav-murder-case-court-verdict.webp   फिरोजाबाद शिकोहाबाद आरव हत्याकांड:  उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की जिला एवं सत्र न्यायालय ने न्याय की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। शिकोहाबाद के बहुचर्चित और रूह कंपा देने वाले मासूम आरव हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा (Death Penalty) सुनाई है। जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने इस क्रूरतम अपराध को "दुर्लभ से दुर्लभतम" (Rarest of Rare) श्रेणी का माना है। सबसे बड़ी बात यह है कि पुलिस की मुस्तैदी और कोर्ट की प्राथमिकता के कारण घटना के महज 41 दिनों के भीतर दोषी को अंजाम तक पहुंचा दिया गया। आइए जानते हैं क्या था यह पूरा मामला और कोर्ट रूम में सजा सुनने के बाद क्या हुआ। क्या था शिकोहाबाद का आरव हत्याकांड? (The Complete Case): यह पूरी घटना 30 मई 2026 को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में घटित हुई थी। मुख्य आरोपी विराज (निवासी बदायूं) अपनी रिश्ते की भाभी (रति शर्मा) पर एकतरफा प्यार में शादी करने का दबाव बना रहा था। जब महिला ने उसके इस अनु...

राम मंदिर चंदा चोरी मामला: जेल में आरोपी, सुप्रीम कोर्ट का रुख और वकीलों का बॉयकॉट; जानिए इसके सभी कानूनी पहलू

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अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान की पेटियों से चंदा चोरी होने का मामला इस समय देश का सबसे बड़ा कानूनी और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। राम भक्तों की आस्था से जुड़े इस मामले में पुलिस प्रशासन से लेकर देश की शीर्ष अदालत तक एक्शन में है। चूँकि यह मामला एक सरकारी आदेश पर बने ट्रस्ट से जुड़ा है, इसलिए इसके कानूनी पहलू बेहद गंभीर हैं।आज 'कानून आज तक' के इस विशेष लेख में हम आपको इस पूरे घोटाले से जुड़े सभी बड़े कानूनी पहलुओं, कोर्ट की कार्यवाही और आरोपियों पर लगी धाराओं के बारे में आसान भाषा में  समझते हैं। 1. मुख्य आरोपी जेल में: कौन सी कानूनी धाराएं लगी उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 25 जून को औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज की थी। इस मामले के मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा और अविनाश शुक्ला सहित 8 लोगों को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर आपराधिक धाराएं लगाई गई हैं आपराधिक गबन (Criminal Breach of Trust): ट्रस्ट की संपत्ति या जनता के पैसे का निजी इस्तेमाल करना...