पहचान परीक्षण परेड (test identification parade) क्या है? जानिए इसके नियम और कानूनी महत्व

Identification parade kya hai


 पहचान परीक्षण परेड(test identification parade) क्या है?

जब भी कोई अपराध होता है, तो अपराधी को पकड़ने और उसे सजा दिलाने में गवाहों(witnesses) का सबसे बड़ा हाथ होता है। कानून में संबंधित अपराध से जुड़े अपराधी की पहचान करने के लिए एक बेहद खास प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसे पहचान परीक्षण परेड(test identification parade) कहते हैं। 

आईडेंटिफिकेशन परेड(identification parade) एक ऐसी कानूनी प्रक्रिया है, जहां किसी अपराध के चश्मदीद गवाह (eye witness) के सामने कई लोगों को एक साथ खड़ा किया जाता है इसमें एक असली संदिग्ध (आरोपी) होता है और बाकी सब लोग बेकसूर होते हैं। गवाह को उनमें से असली अपराधी को पहचानना होता है।

• कानूनी धारा 

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian evidence act 1872/Bhartiya sakshya adhiniyam 2023) के तहत इसका बहुत महत्व होता है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 9 तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 7 में इसका प्रावधान है। 
धारा 7 भारतीय साक्ष्य अधिनियम यह प्रावधानित करती है कि "वे तथ्य, जो विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य के स्पष्टीकरण या पुनःस्थापन के लिए आवश्यक है या जो किसी विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य द्वारा सुझाए गए अनुमान का समर्थन या खंडन करते हैं, या जो किसी व्यक्ति या वस्तु की, जिसकी पहचान सुसंगत है, या वह समय या स्थान नियत करते हैं जब या जहां कोई विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य घटित हुआ, या जो उन पक्षकारों का संबंध दर्शित करते हैं जिनके द्वारा ऐसे किसी तथ्य का संव्यवहार  किया गया था, वहां तक सुसंगत है जहां तक वह उसे प्रयोजन के लिए आवश्यक हो।,,


पहचान परीक्षण परेड (test identification parade) अर्थात (TIP) का सामान्य प्रयोग लंबे समय से संदिग्ध को अन्य व्यक्तियों के साथ पंक्तिबद्ध करके वास्तविक अपराधी की पहचान के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य यह ज्ञात करना होता है कि क्या वह अपराध का भागीदार था या नहीं। यह उन मामलों में आवश्यक हो जाता है, जहां अभियुक्त का नाम उन लोगों द्वारा वर्णित नहीं है जिन्हें घटना का प्रत्यक्ष साक्षी(eye witness) कहां गया है। हालांकि वे अभियुक्त को पहले से नहीं जानते थे किंतु उसे पहचानने के लिए पर्याप्त पहचान विवरण उनकी याददाश्त में है और जब वह उन्हें दुबारा देखेंगे, तब पहचान सकेंगे।

आईडेंटिफिकेशन परेड/पहचान परीक्षण परेड के मुख्य नियम:

इस कार्यवाही को निष्पक्ष (fair) बनाने के लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस को सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है। 

1. मजिस्ट्रेट की मौजूदगी :

यह परेड आमतौर पर एक न्यायिक मजिस्ट्रेट (judicial magistrate) की मौजूदगी में जेल के अंदर होती है ताकि पुलिस का कोई दबाव न रहे। पहचान परीक्षण परेड (test identification parade) का  साक्ष्य की दृष्टि से बड़ा महत्व होता है जिसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (B.N.S.S.) 2023 की धारा 54 में भी स्वीकारा गया है एवं उसके संपोषक एवं विरोधाभासी चरित्र को एस.टी. शिंदे बनाम महाराष्ट्र सरकार, AIR 1974 SC 791 के वाद में स्वीकारा गया है। 


उत्तर प्रदेश में यह व्यापक प्रचलन है कि पहचान परीक्षण प्रक्रिया मजिस्ट्रेट द्वारा संचालित की जाती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने शासकीय आदेश नियमावली 1954 के पैरा 496 में प्रावधान किया है कि पहचान प्रक्रिया किसी अनुभवी मजिस्ट्रेट से कराई जानी चाहिए तथा ऐसे मजिस्ट्रेट पहचान प्रक्रिया को समझने के क्रम में कम से कम 6 पहचान परीक्षण किसी अनुभवी मजिस्ट्रेट की निगरानी  में देखें तत्पश्चात वे स्वयं पहचान परीक्षण कर पाएंगे।

2. पहचान परीक्षण परेड में आरोपी के साथ खड़े अन्य व्यक्तियों का अनुपात: 


अपराधी के साथ खड़े होने वाले अन्य लोगों की संख्या कम से कम 1:5 या 1:10 होनी चाहिए यानि एक आरोपी पर 5 से 10 अन्य व्यक्ति। 

3. समानता (similarity): 

अन्य व्यक्ति का हुलिया, उम्र, कद और कपड़े बिल्कुल आरोपी जैसे होने चाहिए ताकि गवाह आसानी से अनुमान न लगा सके।

4. पुलिस की दूरी: 

जब गवाह पहचान परीक्षण परेड (TIP) कर रहा हो तो पुलिस अधिकारियों को उस कमरे या जगह से दूर रखा जाता है। 

5. गोपनीयता (secrecy):

आरोपी को गवाह के सामने लाने से पहले इस तरह छुपा कर रखा जाता है कि गवाह उसे पहले ना देख सके। 


कोर्ट में इसका महत्व (evidentiary value):

• यह प्राथमिक सबूत नहीं है: 

आईडेंटिफिकेशन परेड अपने आप में कोई पक्का सबूत (substantive evidence) नहीं है। इसके दम पर अकेले सजा नहीं हो सकती।

• सहायक सबूत(Corroborative evidence):

यह सिर्फ एक सहायक सबूत है। यह न्यायालय को यकीन दिलाता है कि पुलिस की विवेचना सही दिशा में जा रही है।


• देरी का असर:

यदि अपराध होने और परेड होने में लंबा समय निकल जाए, तो इसका न्यायिक मूल्य कम हो जाता है क्योंकि इंसान की याददाश्त धुंधली हो सकती है।

निष्कर्ष: 

आईडेंटिफिकेशन परेड किसी भी क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन का एक बेहद संवेदनशील और जरूरी हिस्सा है। यह जहां एक तरफ निर्दोष लोगों को झूठे आरोपों से बचाती है, वहीं दूसरी तरफ असली अपराधी को सजा दिलाने में मजबूत कड़ी बनती है।

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