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B.N.S.S. की धारा 223 के अंतर्गत परिवाद पर संज्ञान आरोपी को सूचित किए बिना नहीं लिया जा सकता : दिल्ली हाई कोर्ट

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ब्रांड प्रोटेक्टर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम अनिल कुमार के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया। जिसमें न्यायालय ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा  संहिता(B.N.S.S.) के तहत धारा 223 के अंतर्गत परिवाद किए जाने पर, कोई भी मजिस्ट्रेट अभियुक्त को सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी शिकायत का संज्ञान नहीं ले सकता।  न्यायमूर्ति मीना बंसल कृष्णा ने  स्पष्ट रूप से यह अभिनिर्धारित किया कि B.N.S.S. की धारा 223, शिकायतकर्ताओं और गवाहों से पूछताछ से संबंधित सीआरपीसी की धारा 200 के प्रावधानों की तरह ही है, लेकिन धारा 223 (1) मैं एक नया प्रावधान भी जोड़ती है जिसके अनुसार संज्ञान लिए जाने के पूर्व आरोपी को सुना जाना अनिवार्य है। यह सीआरपीसी के उस प्रावधान से बिल्कुल अलग है जिसमें संज्ञान के बाद समन जारी होने तक अभियुक्त की कोई भूमिका नहीं होती थी। अभियुक्त मुकदमे की जानकारी होने के बाद भी न्यायालय में अपनी सफाई या निर्दोषिता साबित करने के लिए कोई विधिक कदम नहीं उठा सकता था।  उपरोक्त व्याख्या दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा ब्रांड प्रोटेक्टर्स इंडिया लिमिटेड  की याच...

आजमगढ़ जिले के 95 करोड़ के साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत मंजूर ।

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       मामले की पृष्ठभूमि  आजमगढ़ जिले के बहुचर्चित 95 करोड़ के साइबर ठगी मामले में आरोपी विवेक जायसवाल, जिसके ऊपर कथित रूप से एक फर्जी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफार्म के माध्यम से ठगी करने का आरोप  है। पुलिस द्वारा एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट को उजागर किया गया, जिसमें एक गैंग ने क्रिकेट बज नाम की एक फर्जी गेमिंग वेबसाइट के जरिए लोगों को ठगा। पुलिस के अनुसार इस गैंग ने 208 बैंक खाते के माध्यम से करीब 95 करोड़ की ठगी की। इस मामले में आजमगढ़ साइबर क्राइम थाने में अपराध संख्या 70/2025 पर धारा 318(4),319(2),336(3),338,340(2),111 भारतीय न्याय संहिता (B.N.S.) तथा धारा 3 सार्वजनिक जुआ अधिनियम एवं 66 सी. 66 डी. आई.टी.एक्ट में F.I.R. पंजीकृत हुई थी। पुलिस द्वारा पहले ही इस गिरोह के सात सदस्यों को वाराणसी के पांडेयपुर इलाके से गिरफ्तार कर लिया था। गिरोह पर आरोप है कि कथित रूप से व्हाट्सएप, टेलीग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को लुभाता था और और ऑनलाइन गेम या टास्क के जरिए धन दुगना -तिगुना करने का लालच देकर पीड़ितों द्वारा पैसे ट्रांसफर करने के बा...

B.N.S.S.के लागू होने के बाद गंभीर अपराध में भी अग्रिम जमानत संभव

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      मामले की पृष्ठभूमि  बरेली जिले के थाना देवरनिया, उत्तर प्रदेश में एक प्रथम सूचना रिपोर्ट 647 / 2011 पंजीकृत कराई गई। जिसमें आरोप लगाया गया था कि अब्दुल हमीद व अन्य आरोपीगण जावेद अनवर, अनवर जमीर व बाबू के साथ लाइसेंसी पिस्तौल से लैस होकर शिकायतकर्ता एवं उसके परिवार के सदस्यों पर हमला किया।F.I.R. मैं आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसके परिणाम स्वरूप गुड्डू उर्फ जाकिर हुसैन, शिकायतकर्ता के चाचा की गोली लगने से मौत हो गई। हत्या का कारण पंचायत चुनाव और ठेकेदारी संबंधी विवादों से उपजी पूर्व रंजिश बताया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक गोली का घाव के साथ अंदर और बाहर निकालने के घाव पाए गए।  पुलिस द्वारा जांच की गई और 7. 11.2011 को तीन आरोपियों (जावेद अनवर, अनवर जमीर व बाबू) के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया। उल्लेखनीय है कि अब्दुल हमीद के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया क्योंकि जांच अधिकारी ने उसके विरुद्ध आरोपों को झूठा पाया। गांव के लोगों ने हलफनामे प्रस्तुत किये जिसमें कहा गया कि अब्दुल हमीद घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। मामले का विचा...