Dying Declaration in BSA: नए कानून में मृत्युकालिक कथन के नियम और शर्तें
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के तहत मृत्युकालिक कथन के मुख्य नियम अपराधिक न्याय प्रणाली(criminal justice system) मैं कुछ सबूत ऐसे होते हैं, जो किसी उलझे हुए मामले का रुख पूरी तरह बदल देते हैं। इन्हीं में से एक सबसे महत्वपूर्ण और अचूक साक्ष्य है - मृत्युकालिक कथन (dying declaration)। आमतौर पर अदालत के सामने दिया गया बयान ही सबूत माना जाता है, लेकिन मृत्युकालिक कथन कानून का एक ऐसा अपवाद है जहां मरने वाले व्यक्ति के अंतिम शब्द ही आरोपी को सजा दिलाने का सबसे बड़ा आधार बन जाते हैं। आइए 'कानून आज तक' के इस विशेष लेख में समझते हैं कि नए पुराने कानूनों के तहत मृत्युकालिक कथन का क्या महत्व है और देश की शीर्ष अदालत (supreme court) का इस पर क्या रुख है? 1.मृत्युकालिक कथन का कानूनी आधार: भारतीय साक्ष्य विधि में हाल ही में हुए बड़े बदलावों के बाद इसकी धाराओं में परिवर्तन आया है। .पुराने कानून (Indian evidence act ,1872): पुराने कानून में मृत्युकालिक कथन (dying declaration) धारा 32 (1) के तहत परिभाषित किया गया था। . नए कानून (Bhartiya sakshya adhiniyam 2023- BSA): नए कानू...

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