आजमगढ़ जिले के 95 करोड़ के साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत मंजूर ।


       मामले की पृष्ठभूमि 

आजमगढ़ जिले के बहुचर्चित 95 करोड़ के साइबर ठगी मामले में आरोपी विवेक जायसवाल, जिसके ऊपर कथित रूप से एक फर्जी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफार्म के माध्यम से ठगी करने का आरोप  है। पुलिस द्वारा एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट को उजागर किया गया, जिसमें एक गैंग ने क्रिकेट बज नाम की एक फर्जी गेमिंग वेबसाइट के जरिए लोगों को ठगा। पुलिस के अनुसार इस गैंग ने 208 बैंक खाते के माध्यम से करीब 95 करोड़ की ठगी की।

इस मामले में आजमगढ़ साइबर क्राइम थाने में अपराध संख्या 70/2025 पर धारा 318(4),319(2),336(3),338,340(2),111 भारतीय न्याय संहिता (B.N.S.) तथा धारा 3 सार्वजनिक जुआ अधिनियम एवं 66 सी. 66 डी. आई.टी.एक्ट में F.I.R. पंजीकृत हुई थी। पुलिस द्वारा पहले ही इस गिरोह के सात सदस्यों को वाराणसी के पांडेयपुर इलाके से गिरफ्तार कर लिया था।

गिरोह पर आरोप है कि कथित रूप से व्हाट्सएप, टेलीग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को लुभाता था और और ऑनलाइन गेम या टास्क के जरिए धन दुगना -तिगुना करने का लालच देकर पीड़ितों द्वारा पैसे ट्रांसफर करने के बाद, वह पैसा फर्जी खाता मे भेज दिया जाता था।

 

माननीय उच्च न्यायालय में प्रस्तुत अग्रिम जमानत याचिका में याचिका कर्ता के अधिवक्ता द्वारा लिए गए आधार:-

आवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका सख्या
 5606/2025 में याचिका कर्ता के विद्वान अधिवक्ता ने यह तर्क दिया कि प्रस्तुत मामले में आवेदक को बेवजह झूठा फंसाया गया है। इसी मामले में सह अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित कर दिया गया है जबकि आवेदक के विरुद्ध अभी भी आरोप पत्र प्रेषित नहीं किया गया है। पुलिस कभी-भी आवेदक को गिरफ्तार कर सकती है। आवेदक के विरुद्ध अब तक कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे उसकी इस मामले में संलिप्तता साबित हो सके। 


               न्यायालय का निर्णय 

न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने कहा कि यदि कथित आरोपी को पुलिस गिरफ्तार करती है तो उन्हें 50000 के प्रतिभू दिए जाने पर रिहा किया जाए। 
आवेदक द्वारा जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग देने व समय- समय पर संबंधित अधिकारियों के समक्ष पेश होने के आश्वासन के आधार पर न्यायालय  द्वारा यह  अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार की जाती है।



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