विवाह का वादा कर सहमति से बनाए गए संबंध को बलात्कार नहीं कहा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
मामले की पृष्ठभूमि पश्चिम बंगाल राज्य में कुणाल चटर्जी नामक युवक पर शिकायतकर्ता जो प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करते समय वयस्क थी, ने आरोप लगाया था कि लगभग 3 वर्ष पूर्व जब वह 15 वर्ष की थी, तब युवक ने उससे विवाह का वादा कर उसके साथ संबंध बनाएं। शिकायतकर्ता का आरोप था कि वयस्क होने के बाद आरोपी ने विवाह से इनकार दिया और उसके परिजनों द्वारा उसे अपमानित किया गया जिसके कारण उसने आरोपी युवक वह उसके परिवार के खिलाफ F.I.R. दर्ज कराई। कोलकाता हाईकोर्ट ने आरोपी के माता-पिता और चाचा के विरुद्ध मामला रद्द कर दिया लेकिन मुख्य आरोपी के विरुद्ध कार्यवाही को जारी रखा था, जिसे आरोपी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट का कथन शिकायतकर्ता की की ओर से यह तर्क दिया गया कि नाबालिक की सहमति वैध नहीं मानी जाती इसलिए यह बलात्कार का अपराध गठित होता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस आरोप के समर्थन में कोई साक्ष्य, विशेष कर कोई फॉरेंसिक साक्ष्य मौजूद नहीं है। पीठ ने कहा "यह केवल F.I.R. का आरोप है जिसमें 3 साल बाद कहा गया कि जब शिकायतकर्ता नाबालिक थी, तब बलात्कार किया ग...